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थिन स्लाइसिंग और एन.एल.पी. (पार्ट 3)

थिन स्लाइसिंग और एन.एल.पी. पार्ट 3

एक संकल्पना जो शायद आपकी पूरी ‘निर्णय प्रक्रिया’ को बुनियादी रूप से बदल कर रख देगी

 

 

हम ने पार्ट 1 में थिन स्लाइसिंग की व्याख्या पर चर्चा की थी, उसे थोड़ा दोहराते हैं ।

थिन स्लाइसिंग: ‘थिन स्लाइसिंग’ को ही आम भाषा में ‘स्नॅप जजमेंट’ या ‘फर्स्ट इम्प्रेशन’ भी कहा जाता है, जिसमें पलक झपकते ही किसी निर्णय या अनुमान तक पहुँचने की प्रक्रिया घटित होती है । अचानक किसी मुसीबत से सामना होता है और हमारा मस्तिष्क तुरन्त उस पर विचार कर, पलभर में किसी निर्णय या अनुमान तक पहुँच जाता है । याने ‘थिन स्लाइसिंग’ में कुछ ही पलों में हमारा मस्तिष्क निर्णय ले लेता है । इस ‘थिन स्लाइसिंग’ के लिए हमारी जो दिमागी प्रक्रिया होती है, जिससे कुछ ही पलों में हम निर्णय तक पहुँचने में सक्षम होते हैं, इसे हमारा अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस अंजाम देता है । आज सायकोलॉजी के क्षेत्र में हमारी निर्णय प्रक्रिया को बेहतर करने के लिए, हम किस प्रकार से इस अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस का बेहतर बना सकते हैं, इस पर गहन अध्ययन चल रहा है । संक्षेप में हमारा अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस पलभर में निर्णय ले लेता है, उस प्रक्रिया को हम थिन स्लाइसिंग कहते हैं ।

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि पलभर में होनेवाली इस निर्णय प्रक्रिया का कोई आधार तो होगा? जिसके बूते हमारा अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस निर्णय ले रहा है । याने हमारा अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस जिन बिंदुओं का निरीक्षण करते हुए निर्णय ले रहा है, अगर वे बिंदु और उनका आकलन अगर सही है, तो ही पलभर में सटीक निर्णय हो सकता है । जैसे कि शिक्षक अच्छा है या बुरा इस निर्णय पर पहुँचने के लिए छात्रों के अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस ने जिन बिंदुओं का निरीक्षण किया था, वे बिंदु निर्णय लेने के लिए सबसे बढ़िया थे, इसीलिए सटिक निर्णय हो पाया । अब थोड़ा सोचे, अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस ने अगर जल्दबाजी में गलत बिंदुओं को निर्णय का आधार बना लिया तो, तो क्या निर्णय गलत नहीं होगा? जरूर होगा । इस पर थोड़ा सोचते हैं ।

जैसे ही 1986 में बनी फिल्म ‘एक रूका हुआ फैसला’ शुरू होती है, हमें कोर्ट रूम दिखाई देता है और साथ-साथ एक गुनहगार का चेहरा भी । इस केस की कानूनी कारवाई लगभग खत्म हो चुकी है, पर फिर भी इस गुनहगार की फांसी की सजा को तय करने की आखरी ज़िम्मेदारी 12 ज्यूरीज् के ऊपर है । फिल्म की शुरुआत में जज साहब 12 ज्यूरीज् को एक संदेश देते हुए कहते हैं, “मुजरिम पर क़त्ल का इल्जाम है, अपने पिता के कत्ल का इल्जाम । आपराधिक मुकदमों में हत्या का अपराध सबसे संगीन माना जाता है । कोर्ट सारे बयानों को सुन चुका है, एक शख्स मर चुका है और दूसरे के जिंदगी का फैसला आपके हाथों में है । अब आप मुकदमे की सारी बारीकियों पर एक साथ बैठकर गौर करेंगे और सच्चाई तक पहुँचने की कोशिश करेंगे । इस दौरान कोई विचारणीय मुद्दा आप लोगों को नजर आता है और दलीलों की कसौटी पर खरा उतरता है, तो आप मुजरिम के बेकसुर होने का फैसला दे सकते हैं और अगर मुजरिम कसुरवार साबित होता है, तो ऐसी स्थिति में रहम कोई सिफारिश मंजूर नहीं की जाएगी और अपराधी को फांसी पर चढ़ा दिया जाएगा । आप लोगों का जो भी फैसला हो, वह एकमत से होना जरूरी है । मुझे उम्मीद है कि आप लोग पूरी संजीदगी, सत्यनिष्ठा और ईमानदारी से अपनी ज़िम्मेदारी निभाएंगे । धन्यवाद!”

और इस प्रकार 12 ज्यूरी मेंबर्स एक हॉल में एकठ्ठा होते हैं, यह तय करने के लिए कि क्या मुजरिम को फांसी दी जाए या नहीं और सबसे पहले यह तय होता है कि वोटिंग होगी, जिन्हें लगता है कि मुजरिम कसुरवार है, वे हाथ ऊपर उठाएंगे । अगर 12 में से 12 ज्यूरी सदस्य सहमत होते हैं, तो तुरन्त मुजरिम को फांसी का फैसला सुनाया जाएगा और इसप्रकार से ‘थिन स्लाइसिंग’ या ‘फर्स्ट इम्प्रेशन’ या ‘स्नॅप जजमेंट’ का एक बढ़िया उदाहरण हमारे सामने पेश होता है । मुजरिम गुनहगार है तथा उसे फांसी होनी चाहिए, यह माननेवाले ज्यूरी मेंबर्स फटाफट हाथ ऊपर उठाने लगते हैं और 12 में से 11 लोग यह मानकर चलते हैं कि मुजरिम कसुरवार है । पर सिर्फ एक ही ज्यूरी ऐसा है कि जिसे लगता है कि मुजरिम कसुरवार नहीं है और इसप्रकार से फैसला अटक जाता है । आखिरकार एक ज्यूरी की राय अलग होने की वजह से बातचीत शुरू करना अनिवार्य हो जाता है और फिर आगे बढ़ती बातचीत के जरिए हमें इन 11 ज्यूरी सदस्यों ने किस प्रकार से गलत बिंदुओं पर ‘थिन स्लाइसिंग’ की, इसका पता लगना शुरू होता है ।

अब सवाल यह उठता है कि इन 11 ज्यूरी सदस्यों ने किस आधार पर कुछ ही पलों में मुजरिम को फांसी के तख्त तक पहुँचा दिया? निर्णय तक पहुँचने के लिए इनके मस्तिष्क ने क्या किया? किस आधार पर पलभर में इन लोगों ने यह तय कर लिया कि मुजरिम को फांसी होनी चाहिए?

अब थोड़ा इन 11 ज्यूरी मेंबर्स के मस्तिष्क में झांकते हैं । नीचे इन 11 ज्यूरी मेंबर्स ने फांसी के समर्थन में दिए हुए तर्क है, कि क्यों लड़का गुनहगार है और उसे फांसी होनी चाहिए । इन तर्कों पर थोड़ा सोचे, यहीं वे तर्क हैं, जिनके आधार पर मस्तिष्क ‘थिन स्लाइसिंग’ करते हुए पलभर में इस निर्णय तक पहुँच गया कि फांसी होनी ही चाहिए ।

1. बिल्कुल साफ जाहीर है, मैंने तो जब उसका चेहरा देखा, उसी समय मुझे समझ में आ चुका था कि वह कातिल है ।

थिन स्लाइसिंग का आधार: यहाँ पर मस्तिष्क ‘थिन स्लाइसिंग’ चेहरे के आधार पर कर रहा है, इसका चेहरा भयावह है, इसका मतलब ही यह हुआ कि यह गुनहगार है, भयावह चेहरे को निर्णय का अधार बनाना ‘थिन स्लाइसिंग’ को गलत निर्णय तक पहुँचा रहा है ।

2. ये लोग ऐसे ही होते हैं, उन्हें जल्द से जल्द फांसी देनी चाहिए, जिससे हमारा समाज स्वच्छ हो जाए ।

थिन स्लाइसिंग का आधार: यहाँ पर मस्तिष्क ‘थिन स्लाइसिंग’, मुजरिम के निचले तबके के होने को बुनियाद मानकर, कर रहा है, जो कि एकदम गलत है । याने मस्तिष्क यह मानकर चल रहा है, कि निचला तबका याने गुनहगार लोग ।

3. 11 ज्यूरी मेंबर्स एक बाजू है, इसका मतलब ही यह हुआ कि वह कातिल है, बहस की कोई गुंजाइश ही नहीं बनती ।

थिन स्लाइसिंग का आधार: यहाँ पर मस्तिष्क ‘थिन स्लाइसिंग’ मेजॉरिटी या बहुमत को आधार बनाते हुए निर्णय तक पहुँच रहा है । याने जिसके पास बहुमत है वह सही, अल्पमत वाला गलत ।

4. मुझे लगता है कि लड़का कसुरवार है और यह पाँच मिनट में तय हो सकता है और अगर आप सौ साल तक बातचीत करते रहें, तो भी कुछ नहीं बदलने वाला, मेरा मस्तिष्क आप नहीं बदल सकते ।

थिन स्लाइसिंग का आधार: अति आत्मविश्वास या मैं जो मानता हूँ वही सही है, इस आधार पर क्या मस्तिष्क सही निर्णय तक पहुँच पाएगा?

5. लड़के का भूतकाल: लड़का गरीब परिवार से है, उसकी परवरिश शहर के सबसे गंदे इलाके में हुई है, जब वह नौ साल का था, तब उसकी माँ उसे छोड़कर चली गयी, पिता जब चोरी के इल्जाम में जेल में थे, तब यह बच्चा यतिम खाने में दिन काट रहा था ।

लड़के का भूतकाल जानने के बाद एक ज्यूरी कहता है, मैं इन लोगों को अच्छी तरह से जानता हूँ, इन लोगों की पूरी की पूरी कौम ही खराब है । इनके किसी बात पर यकीन कर लेना सरासर बेवकूफी है । इस प्रकार के लोग पैदाइशी झूठे होते हैं ।

थिन स्लाइसिंग का आधार: गरीबी, बाप चोर, गंदा इलाका इ. काफी है, उसे फांसी देने के लिए । याने अगर कोई किसी अलग कौम से है, नीचले तबके से है, तो उसकी पृष्टभूमी काफी है, उसको गुनहगार साबित करने के लिए । अगर मस्तिष्क इस आधार पर ‘थिन स्लाइसिंग’ करेगा, तो निर्णय गलत होना लाजमी है ।

6. मुझे लगता है, लड़का दोषी है, क्योंकि इसके विपरीत किसी ने कुछ साबित नहीं किया । मुझे पता नहीं, पर मुझे लगता है कि लड़का दोषी है । मुझे यह महसूस हो रहा है ।

थिन स्लाइसिंग का आधार: वह बेकसूर है, इसका कोई प्रमाण नहीं है, तो इसका मतलब ही यह हुआ कि वह गुनहगार है । अगर मस्तिष्क इस तरीके से स्नॅप जजमेंट ले, तो निर्णय घातक ही साबित होगा ।

इसका तात्पर्य यह हुआ कि ‘थिन स्लाइसिंग’ एक ताकतवर और जादूई प्रक्रिया है, पर अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस ने अगर जल्दबाजी में गलत बिंदुओं को अधार बनाते हुए निर्णय लिया, तो निर्णय गलत होना लाजमी है । तो क्या इससे बचा जा सकता है? हाँ जरूर, पर इसमे एक समस्या है, ‘थिन स्लाइसिंग’ प्रक्रिया कुछ ही पलों में हो जाती है और वह भी हमारे अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस के द्वारा । याने हमारी समझ में कुछ आए, इसके पूर्व ही अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस निर्णय ले लेता है ।

तो आखिरकार अब सवाल यह उठता है कि क्या इस अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस को ट्रेन किया जा सकता है, जिससे निर्णय गलत होने की संभावना को कम से कम किया जा सके? क्या इस अडॅप्टीव्ह अन्कॉन्शस की ‘थिन स्लाइसिंग’ प्रक्रिया को नियंत्रित कर दिशा दी जा सकती है?

अगले ब्लॉग में इन सवालों के जवाब ढूंढते हैं ।

तब तक के लए ‘एन्जॉय युवर लाईफ एंड लिव्ह विथ पॅशन ।’

थिन स्लाइसिंग और एन.एल.पी. (पार्ट 3)

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